भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रह सकता है। जून से सितंबर के बीच कुल वर्षा लंबी अवधि के औसत (LPA) के लगभग 90% से 95% के बीच रहने का अनुमान है। यहां LPA का अर्थ 1971 से 2020 के आधार पर तय औसत वर्षा से है, जिसे करीब 87 सेंटीमीटर माना जाता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल अल नीनो (El Niño) के सक्रिय होने की संभावना है, जो भारतीय मॉनसून को कमजोर कर सकता है। आमतौर पर अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे भारत में वर्षा कम हो जाती है। हालांकि, हिंद महासागर में फिलहाल न्यूट्रल IOD (Indian Ocean Dipole) की स्थिति बनी हुई है, लेकिन मॉनसून के अंतिम चरण तक इसके पॉजिटिव IOD में बदलने के संकेत हैं। IMD लगातार समुद्री सतह के तापमान (SST) की निगरानी कर रहा है, क्योंकि इनका मॉनसून की तीव्रता और वितरण पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
IMD के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्र के अनुसार, “देशभर में मौसमी वर्षा LPA का लगभग 92% रहने की संभावना है, जिसमें ±5% की मॉडल त्रुटि शामिल है।” उन्होंने यह भी बताया कि जनवरी से मार्च के बीच उत्तरी गोलार्ध में बर्फ का आवरण सामान्य से थोड़ा कम रहा है। आमतौर पर सर्दियों और वसंत ऋतु में बर्फ की स्थिति का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से विपरीत संबंध होता है, जिसका असर आगे देखने को मिल सकता है। IMD हर साल अप्रैल के मध्य में पहला मॉनसून पूर्वानुमान जारी करता है और मई के अंत में इसे अपडेट करता है।
मॉनसून में कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर पड़ सकता है। खासकर सोयाबीन, धान, मक्का और दालों जैसी फसलों के लिए समय पर और पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी होती है। ऐसे में किसानों को मौसम अपडेट पर नजर रखते हुए फसल योजना में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
FAQs:
Q1. क्या 2026 का मॉनसून कमजोर रहेगा?
हाँ, IMD के अनुसार मॉनसून सामान्य से थोड़ा कमजोर यानी 90%–95% LPA के बीच रह सकता है।
Q2. LPA क्या होता है?
LPA का मतलब Long Period Average है, जो 1971–2020 के औसत वर्षा पर आधारित होता है।
Q3. El Niño का क्या असर होता है?
El Niño समुद्री तापमान बढ़ाकर भारत में वर्षा को कम कर सकता है।
Q4. क्या IOD मॉनसून को प्रभावित करता है?
हाँ, Indian Ocean Dipole मॉनसून की ताकत और वितरण को प्रभावित करता है।
Q5. किसानों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
किसानों को मौसम अपडेट देखकर फसल योजना बनानी चाहिए और जल संरक्षण तकनीक अपनानी चाहिए।