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MP News: मध्य प्रदेश के किसानों की मौज! अब ड्रोन और सैटेलाइट बताएंगे आपकी फसल का हाल

मध्य प्रदेश खेती नई तकनीक
मध्य प्रदेश खेती नई तकनीक

मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा विकसित ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली के माध्यम से अब उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के जरिए वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है। इस पहल से फसल निगरानी और उत्पादन के आंकलन को मजबूत वैज्ञानिक आधार मिला है, जिससे किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिल पा रहा है।

‘सारा’ और ‘उन्नति’ से फसल गिरदावरी हुई डिजिटल:

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म और ‘सारा’ एप्लिकेशन के जरिए क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीकी बनाया गया है। डीप लर्निंग तकनीक के माध्यम से ‘सारा’ ऐप से प्राप्त लाखों खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण कर वास्तविक फसल की पहचान और सत्यापन किया जा रहा है। इससे खेत स्तर पर बोई गई फसलों की सही जानकारी मिल रही है और अनुमान की जगह सटीक डेटा आधारित निर्णय संभव हो रहे हैं।

सैटेलाइट और AI से फसल पहचान में बड़ी प्रगति:

स्मार्ट क्रॉप मैपिंग के लिए उपग्रह चित्रों और रैंडम फॉरेस्ट मॉडल का उपयोग कर खसरा स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही अधिसूचित फसलों के लिए ‘पटवारी हल्का’ स्तर पर उपज का पूर्वानुमान भी तैयार किया जा रहा है। यह प्रणाली कृषि योजना निर्माण, खाद्यान्न खरीदी व्यवस्था और फसल बीमा प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर रही है।

सटीकता में बड़ा सुधार, करोड़ों खेतों का विश्लेषण:

इस तकनीकी पहल से फसल पहचान और आकलन की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2022 में जहां यह सटीकता 66 प्रतिशत थी, वहीं 2025 तक बढ़कर करीब 85 प्रतिशत हो गई है। हाल ही के रबी और खरीफ सीजन में इस प्रणाली के तहत 5.37 करोड़ से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है, जिससे रीयल-टाइम फसल पहचान संभव हुई है। साथ ही 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों का डिजिटल मैपिंग किया गया है और प्रमुख फसलों की पहचान व गिरदावरी का सत्यापन भी किया जा रहा है। वर्ष 2023 से करीब 22 हजार ‘पटवारी हल्का’ क्षेत्रों में फसल उत्पादन का नियमित आंकलन किया जा रहा है।

किसानों और बीमा कंपनियों के लिए फायदेमंद:

मुख्यमंत्री ने कहा कि जियो-स्पेशियल तकनीक, AI और ML आधारित यह प्रणाली किसानों, सर्वेक्षकों और फसल बीमा कंपनियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। इससे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में फसल नुकसान का समय पर और सटीक आकलन संभव होगा, जिससे किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तेज और पारदर्शी बनेगी।

FAQs:

1. Khetivyapar क्या है?
Khetivyapar एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो किसानों को फसल निगरानी, उत्पादन आकलन और योजना लाभ में मदद करता है।

2. ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एप्लिकेशन कैसे काम करते हैं?
ये एप्लिकेशन उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और AI/ML तकनीक से खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण करते हैं और फसल की सटीक जानकारी प्रदान करते हैं।

3. इस प्रणाली से किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
किसान समय पर फसल जानकारी, योजना लाभ और बीमा मुआवजा अधिक पारदर्शी और तेज़ तरीके से प्राप्त कर सकेंगे।

4. डिजिटल क्रॉप मैपिंग क्यों महत्वपूर्ण है?
यह फसल गिरदावरी, उत्पादन पूर्वानुमान और कृषि योजना निर्माण को वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है।

5. AI और ML का उपयोग फसल प्रबंधन में कैसे किया जा रहा है?
AI और ML का उपयोग खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण, फसल पहचान और उत्पादन आंकलन के लिए किया जा रहा है, जिससे सटीक और डेटा आधारित निर्णय संभव हैं।

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