मध्यप्रदेश के रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक आयोजित होने जा रहा तीन दिवसीय ‘कृषि महाकुंभ’ किसानों के लिए आय बढ़ाने के नए रास्ते खोलने वाला बड़ा आयोजन साबित होगा। इस महाकुंभ का उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ-साथ डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और बकरी पालन जैसे क्षेत्रों को जोड़कर किसानों के लिए आय के मजबूत और विविध स्रोत तैयार करना है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan के अनुसार, यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन ‘बीज से बाजार’ तक पूरी कृषि वैल्यू चेन को एक ही मंच पर प्रस्तुत करेगा। रायसेन के दशहरा मैदान में आयोजित इस मेले में उत्पादन, पशुपालन, प्रसंस्करण, विपणन और उद्यमिता से जुड़े सभी पहलुओं का लाइव प्रदर्शन, तकनीकी सत्र, प्रशिक्षण और बिजनेस मीटिंग्स आयोजित होंगी। वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को सीधे संवाद का अवसर मिलेगा।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में गिर, साहीवाल, थारपारकर और मालवी जैसी उन्नत नस्लों के पशु प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही जमुनापरी, बरबरी, सिरोही, बीटल और सोjat जैसी बकरी नस्लों और कड़कनाथ जैसी विशेष पोल्ट्री नस्लों का प्रदर्शन भी होगा, जिससे किसान उच्च मूल्य वाले बाजारों से जुड़ने के तरीके समझ सकेंगे।
मोबाइल वेटनरी यूनिट, पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण और पोषण प्रबंधन, प्रजनन व नस्ल सुधार पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। इससे छोटे और सीमांत पशुपालकों को कम लागत में उत्पादकता बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके सीखने में मदद मिलेगी। साथ ही डेयरी सहकारिता, चारा प्रबंधन, गोबर आधारित ऊर्जा और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।
मत्स्य विभाग और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड द्वारा बायोफ्लॉक, रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), एक्वापोनिक्स, सजावटी मछली पालन और मोती उत्पादन जैसे आधुनिक मॉडल प्रस्तुत किए जाएंगे। इन तकनीकों के माध्यम से किसान कम पानी और सीमित जगह में भी अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, राष्ट्रीय मत्स्य विकास कार्यक्रम और फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड जैसी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे किसान खेती के साथ जल आधारित व्यवसायों को जोड़कर सालभर आय प्राप्त कर सकें।
50 से अधिक एफपीओ को मिलेगा राष्ट्रीय मंच:
मार्केटिंग सेक्शन में 50 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPO) अपने वैल्यू एडेड उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे। इनमें जीआई टैग चिन्नौर चावल, शरबती गेहूं, मोटे अनाज (कोदो-कुटकी), दालें, बेसन, सोया उत्पाद, हल्दी, लहसुन, मोरिंगा पाउडर, सरसों और अलसी का तेल, शहद, अचार, गुड़ और उससे बने उत्पाद शामिल होंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान और बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
12 अप्रैल को आयोजित एफपीओ सम्मेलन में ब्रांडिंग, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और ई-ट्रेड जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी, जिससे छोटे किसान समूहों को आधुनिक बाजार से जुड़ने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण महिलाओं की मजबूत भागीदारी:
इस आयोजन में ‘कृषि सखी’, ‘आजीविका दीदी’, ‘ड्रोन दीदी’ और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। ये समूह अपने सफल उद्यम मॉडल जैसे ऑर्गेनिक उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, मल्टी-लेयर फार्मिंग, नर्सरी, ड्रोन सेवाएं और कृषि उपकरण बैंक का प्रदर्शन करेंगे। इससे ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
युवाओं के लिए नए अवसर:
कृषि महाकुंभ में किसानों के लिए मुफ्त प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं की जानकारी, एग्री-स्टार्टअप प्रस्तुतियां और वैज्ञानिकों से सीधा संवाद प्रमुख आकर्षण होंगे। यह पहल न केवल खेती को आधुनिक बनाने में मदद करेगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा करेगी।
FAQs:
Q1. कृषि महाकुंभ 2026 कहां आयोजित होगा?
रायसेन, मध्यप्रदेश में दशहरा मैदान में आयोजित होगा।
Q2. कृषि महाकुंभ कब से कब तक चलेगा?
यह 11 से 13 अप्रैल 2026 तक आयोजित होगा।
Q3. कृषि महाकुंभ में किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
नई तकनीक, प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं की जानकारी और बिजनेस अवसर मिलेंगे।
Q4. क्या पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी जानकारी मिलेगी?
हाँ, डेयरी, पोल्ट्री, बकरी पालन और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का प्रदर्शन होगा।
Q5. क्या युवाओं के लिए भी अवसर हैं?
हाँ, एग्री-स्टार्टअप, प्रशिक्षण और रोजगार के कई नए अवसर उपलब्ध होंगे।