मध्यप्रदेश में कृषि को अधिक लाभकारी और आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने उद्यानिकी क्षेत्र पर खास फोकस बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ किया है कि कम जमीन में ज्यादा मुनाफा देने वाली उद्यानिकी फसलें किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत आधार बन सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार न केवल उद्यानिकी रकबे का विस्तार कर रही है, बल्कि जैविक खेती, आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए किसानों को अधिक लाभ दिलाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।
प्रदेश मसाला फसलों के उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है, जबकि फूल और सब्जी उत्पादन में तीसरे तथा फल उत्पादन में चौथे स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना है। इसके लिए हॉर्टिकल्चर प्रमोशन एजेंसी के गठन की प्रक्रिया जारी है।
सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए 19 एकड़ भूमि पर ‘सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर’ स्थापित किया जाएगा। केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रदेश के कई उद्यानिकी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया जारी है। इनमें जबलपुर का मटर, गुना का कुंभराज धनिया, बुरहानपुर का केला, रतलाम का लहसुन, खरगोन की मिर्च और इंदौर का मालवी आलू शामिल हैं।
राज्य के 14 जिलों में मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस वर्ष इसका रकबा बढ़ाकर 85 हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार इस योजना के तहत 40% तक अनुदान भी प्रदान कर रही है।
महोत्सवों से मिलेगा बाजार:
प्रदेश में आम, मिर्च, केला, सब्जी और अमरूद महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और उद्यानिकी उत्पादों की ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है।
आधुनिक तकनीक और हाईटेक सुविधाएं:
सूक्ष्म सिंचाई का विस्तार 15 हजार हेक्टेयर में किया जा रहा है। साथ ही 40 नर्सरियों को हाईटेक बनाया जा रहा है और स्मार्ट बीज फार्म विकसित किए जा रहे हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रसंस्करण और रोजगार पर जोर: मुख्यमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। छोटे स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
FAQs:
Q1. उद्यानिकी खेती क्या है?
उद्यानिकी खेती में फल, सब्जी, फूल और मसालों की खेती शामिल होती है।
Q2. मध्यप्रदेश में उद्यानिकी क्यों बढ़ रही है?
कम लागत में ज्यादा मुनाफा और सरकारी योजनाओं के कारण इसका विस्तार हो रहा है।
Q3. GI टैग से किसानों को क्या फायदा होगा?
GI टैग से उत्पादों की पहचान बढ़ती है और बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।
Q4. मखाना खेती पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
केंद्र सरकार इस पर करीब 40% तक अनुदान देती है।
Q5. क्या उद्यानिकी खेती से आय बढ़ सकती है?
हाँ, सही तकनीक और बाजार मिलने पर यह खेती ज्यादा लाभदायक साबित होती है।