जयपुर में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन ने भारतीय कृषि के भविष्य के लिए एक नया रोडमैप प्रस्तुत किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि अब देश को विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित कर प्रत्येक राज्य के लिए अलग रणनीति तैयार की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य खेती को अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।
सम्मेलन में देशभर के वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों, एफपीओ, नाफेड और अन्य संस्थानों ने भाग लिया। अब देश को पांच प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटकर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। हर राज्य की जलवायु, मिट्टी और संसाधनों के आधार पर उपयुक्त फसल, किस्म और खेती के तरीकों का निर्धारण किया जाएगा।
सरकार द्वारा शुरू की जा रही फार्मर आईडी व्यवस्था को किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके माध्यम से उर्वरक, बीज, फसल बीमा और मुआवजे की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और लक्षित बनेगी। किसानों को उनकी भूमि और फसल के अनुसार सीधे लाभ मिलेगा, जिससे कालाबाजारी और नकली उत्पादों पर भी रोक लगेगी। साथ ही, पट्टेदार किसान भी भूमि स्वामी की सहमति से इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन के तहत वर्ष 2024-25 में 429.89 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष 396.69 लाख टन था। उत्पादकता भी बढ़कर 1412 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। सरकार अब तिलहन क्षेत्र का विस्तार 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर और उत्पादन 39.2 मिलियन टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन टन करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए ₹10,103 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके तहत किसानों को बेहतर बीज, तकनीक, सिंचाई, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे आय में वृद्धि होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
दलहन मिशन: बीज से बाजार तक मजबूत व्यवस्था:
दलहन मिशन के तहत बीज उत्पादन बढ़ाने, नई किस्मों को तेजी से अपनाने और दाल मिलों का नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया गया है। किसानों से 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। बीज उत्पादन के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है, जिससे गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ेगी।
‘लैब टू लैंड’ मॉडल को मिलेगा बढ़ावा:
करीब 16,000 वैज्ञानिकों को ‘लैब टू लैंड’ मॉडल के तहत सीधे किसानों से जोड़ा जाएगा, ताकि नई तकनीक और शोध का लाभ खेत तक पहुंच सके। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती और एकीकृत कृषि मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा तथा नकली कृषि आदानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस:
सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि करना भी है। इसके लिए मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और बेहतर विपणन व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और मजबूरी में बिक्री (डिस्ट्रेस सेल) की स्थिति से बचा जा सके।
FAQs:
Q1. कृषि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
किसानों की आय बढ़ाना और खेती को क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार विकसित करना।
Q2. फार्मर आईडी से किसानों को क्या फायदा होगा?
इससे सब्सिडी, बीमा और मुआवजा सीधे और पारदर्शी तरीके से मिलेगा।
Q3. तिलहन मिशन का लक्ष्य क्या है?
उत्पादन बढ़ाकर देश को खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाना।
Q4. ‘लैब टू लैंड’ मॉडल क्या है?
इसमें वैज्ञानिकों की नई तकनीक सीधे किसानों तक पहुंचाई जाती है।
Q5. क्या इस योजना से किसानों की आय बढ़ेगी?
हां, बेहतर बाजार, प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन से आय बढ़ाने का लक्ष्य है।