प्रदेश में “कृषक कल्याण वर्ष 2026” के तहत कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को मजबूत बनाने के लिए व्यापक स्तर पर योजनाएं लागू की जा रही हैं। कृषि सचिव श्री निशांत वरवड़े ने जानकारी देते हुए बताया कि 11 जनवरी 2026 को इस अभियान का शुभारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य आत्मनिर्भर किसान, उन्नत खेती और मूल्य-श्रृंखला आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।
मध्यप्रदेश एग्रीस्टैक योजना के क्रियान्वयन में देश में पहले स्थान पर है। इस योजना के तहत किसानों का पूरा डेटा एक क्लिक पर उपलब्ध हो रहा है। इसमें फार्मर रजिस्ट्री, लैंड रजिस्ट्री और फसल रजिस्ट्री (गिरदावरी) जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। ई-विकास प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को खाद वितरण की प्रक्रिया भी सरल और पारदर्शी बनाई गई है।
ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने प्रति क्विंटल 600 रुपये बोनस देने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, गेहूं कटाई और नरवाई प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र योजना संचालित की जा रही है। गौशालाओं को भूसा निर्माण हेतु मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रदेश के “वृंदावन ग्रामों” को कृषि ग्राम के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई गई है, जहां उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गांवों को सम्मानित किया जाएगा।
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। राज्य मसाले और दलहन उत्पादन में देश में प्रथम, खाद्यान्न में द्वितीय और दूध, फल-सब्जी व फूल उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। वर्तमान में प्रदेश में 4,000 से अधिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट संचालित हैं। पिछले दो वर्षों में 47 कंपनियों ने 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव दिए हैं।
प्रदेश का एग्री एक्सपोर्ट वर्तमान में 18,000 करोड़ रुपये है, जिसे 2028 तक 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके अलावा 36 ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) और 27 जीआई टैग के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश में गैर-जीएमओ ऑर्गेनिक कपास उत्पादन का 47 प्रतिशत हिस्सा है। धार जिले में देश का पहला पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है, जिससे 5 लाख किसानों को लाभ और करीब 3 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। राज्य में 7,000 से अधिक स्टार्ट-अप सक्रिय हैं, जिनमें से लगभग 600 कृषि आधारित हैं।
₹25,000 करोड़ बिना ब्याज ऋण और मुफ्त बिजली का लाभ:
मत्स्य क्षेत्र में “एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026” के तहत केज कल्चर योजना लागू की गई है। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सहकारिता विभाग ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर 25,000 करोड़ रुपये के फसल ऋण वितरण का लक्ष्य रखा है। वहीं, ऊर्जा विभाग द्वारा छोटे किसानों को मुफ्त बिजली और बकाया सरचार्ज में राहत दी जा रही है।
उद्यानिकी और मखाना खेती का विस्तार: उद्यानिकी विभाग ने वर्तमान 10 प्रतिशत क्षेत्रफल को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। फल, सब्जी, मसाला, पुष्प और औषधीय फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही मखाना खेती को चार जिलों से बढ़ाकर अन्य क्षेत्रों में विस्तार करने की योजना है। कुल मिलाकर, “कृषक कल्याण वर्ष 2026” कृषि, उद्योग और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़कर प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।
FAQs:
Q1. कृषक कल्याण वर्ष 2026 क्या है?
यह एक सरकारी अभियान है, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना है।
Q2. एग्रीस्टैक योजना क्या है?
यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसमें किसानों का पूरा डेटा सुरक्षित रखा जाता है।
Q3. उड़द पर 600 रुपये बोनस किसके लिए है?
यह बोनस ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए दिया जा रहा है।
Q4. किसानों को बिना ब्याज ऋण कैसे मिलेगा?
सहकारिता विभाग के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जाएगा।
Q5. इस योजना से किसानों को क्या लाभ होगा?
इससे किसानों की आय बढ़ेगी, खेती आसान होगी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।