बेमौसम बारिश ने खड़ी और कटी दोनों तरह की फसलों को नुकसान पहुंचाया है, वहीं सरकारी खरीद व्यवस्था में बदलाव से मुश्किलें बढ़ गई हैं। उत्तर भारत के कई राज्यों में जहां गेहूं की कटाई अधूरी है, वहीं मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में कटाई पूरी होने के बावजूद किसान अपनी उपज बेचने के लिए जूझ रहे हैं।
कई राज्यों में किसान सरकारी खरीद नीतियों से असमंजस में हैं। खरीद की तारीखों में बार-बार बदलाव और सख्त नियमों के कारण किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचना आसान नहीं रह गया है। हरियाणा में किसान संगठनों ने इन नियमों का विरोध भी शुरू कर दिया है और सरकार से प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग कर रहे हैं।
पंजाब में अचानक हुई बारिश ने गेहूं किसानों को बड़ा झटका दिया है। करीब 1.30 लाख एकड़ में खड़ी फसल प्रभावित हुई है। यह बारिश उस समय हुई जब फसल कटाई के लिए तैयार थी। आमतौर पर इस समय मंडियां गेहूं से भर जाती हैं, लेकिन इस बार आवक काफी कम है। अब तक सीमित मात्रा में ही गेहूं मंडियों तक पहुंच पाया है, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ रहा है।
फाजिल्का क्षेत्र में लगातार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की खड़ी फसल को लगभग नष्ट कर दिया है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी मेहनत और लागत पानी में बह गई। इस स्थिति ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया है। प्रभावित किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार से जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे इस कठिन समय से उबर सकें।
धौलपुर में कटी फसल भी खतरे में राजस्थान के धौलपुर में तेज आंधी और बारिश ने पहले से कटी पड़ी गेहूं की फसल को भी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में रखी फसल दोबारा भीगने से गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर नुकसान की खबरें भी सामने आई है।
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं का दौर जारी है। इसका असर फसलों और बागवानी पर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर ऊपरी शिमला क्षेत्र में सेब की फसल को नुकसान हुआ है। अचानक हुए मौसम बदलाव ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है।
मध्यप्रदेश में खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बढ़ावा:
मध्यप्रदेश में सरकार ने गेहूं खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग की सुविधा शुरू की है। इसके जरिए किसान तय समय पर खरीद केंद्रों पर पहुंचकर अपनी उपज बेच सकेंगे, जिससे भीड़ और इंतजार की समस्या कम होगी। अलग-अलग संभागों में चरणबद्ध तरीके से खरीद शुरू की जा रही है। राज्य में इस वर्ष हजारों खरीद केंद्र बनाए गए हैं और बड़ी संख्या में किसानों ने पंजीकरण कराया है। सरकार ने समर्थन मूल्य के साथ बोनस भी जोड़कर किसानों को बेहतर दाम देने की व्यवस्था की है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम बनाई जाए।
FAQs:
Q1. बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा किस फसल को नुकसान हुआ है?
Ans: सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है, खासकर कटाई के समय।
Q2. क्या MSP पर गेहूं बेचना मुश्किल हो गया है?
Ans: हां, सरकारी खरीद प्रक्रिया में बदलाव और सख्त नियमों के कारण दिक्कतें बढ़ी हैं।
Q3. पंजाब में कितनी फसल प्रभावित हुई है?
Ans: करीब 1.30 लाख एकड़ में गेहूं की फसल प्रभावित हुई है।
Q4. मध्यप्रदेश में क्या नई सुविधा शुरू हुई है?
Ans: ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग सुविधा शुरू की गई है।
Q5. किसानों को क्या करना चाहिए?
Ans: किसानों को मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए और समय पर गेहूं खरीद प्रक्रिया का लाभ लेना चाहिए।