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केला किसानों के लिए बड़ी सौगात: ₹200 करोड़ का ‘केला क्लस्टर’ बनेगा, कृषि क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

केला क्लस्टर परियोजना
केला क्लस्टर परियोजना

केला उत्पादक किसानों के लिए बड़ी राहत और अवसर की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने लंबे समय से लंबित ₹200 करोड़ की ‘केला क्लस्टर’ परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिससे क्षेत्र में आधुनिक बागवानी, भंडारण और निर्यात से जुड़ी सुविधाओं का तेजी से विकास होगा। यह पहल न केवल उत्पादन और गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जळगांव में ₹200 करोड़ का केला क्लस्टर मंजूर:

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लंबे समय से लंबित जळगांव ‘केला क्लस्टर’ परियोजना को अब मंजूरी मिल गई है, जिसे ₹200 करोड़ की लागत से विकसित किया जाएगा। इस क्लस्टर के तहत गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस (GAP), यंत्रीकरण, बायो-कंट्रोल, फल कवरिंग और प्री-कूलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, राइपनिंग चैंबर, रेफ्रिजरेटेड वैन, प्रोसेसिंग और निर्यात से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जाएगा। इन सुविधाओं के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) और कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के तहत किसानों को सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

किसानों को उचित मूल्य दिलाने पर जोर:

श्री चौहान ने किसानों को मिलने वाले कम दाम और शहरी बाजारों में ऊंचे दाम के बीच के अंतर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार किसानों को टमाटर जैसी फसलें बहुत कम कीमत पर बेचनी पड़ती हैं, जबकि वही उत्पाद शहरों में महंगे दामों पर बिकते हैं। इस अंतर को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रभावी तंत्र विकसित करेंगे, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

MSP के विकल्प पर काम:

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केला जैसी फसलों को लंबे समय तक भंडारित करना संभव नहीं होता, इसलिए इन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था में शामिल करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में सरकार एक वैकल्पिक मॉडल पर विचार कर रही है, जिसमें बाजार मूल्य गिरने की स्थिति में किसानों को लागत या निर्धारित मूल्य और बाजार मूल्य के बीच का अंतर भरपाई के रूप में दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मिर्च और आम जैसी फसलों पर इस तरह के प्रयोग किए जा चुके हैं और ‘पीएम-आशा’ योजना के तहत नए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।

प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील:

श्री चौहान ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है। उन्होंने बताया कि मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा कम हो रही है और लाभकारी कीट नष्ट हो रहे हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और छोटे स्तर से शुरुआत करने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि सही तरीके से अपनाई गई प्राकृतिक खेती उत्पादन को कम नहीं करती, बल्कि जमीन की क्षमता और उत्पादकता को बढ़ाती है।

किसानों के सुझावों पर बनेगा रोडमैप:

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों और सुझावों के समाधान के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। साथ ही, जळगांव के केले को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सभी के कल्याण की कामना की।

FAQs – केले क्लस्टर परियोजना 2026:

Q1: केले क्लस्टर परियोजना का लाभ किसानों को कैसे मिलेगा?
A1: किसानों को आधुनिक बागवानी, भंडारण, प्रोसेसिंग और निर्यात के लिए सब्सिडी और सुविधा मिलेगी।

Q2: इस परियोजना की कुल लागत कितनी है?
A2: यह परियोजना ₹200 करोड़ की लागत से विकसित की जाएगी।

Q3: MSP विकल्प क्या है?
A3: बाजार मूल्य गिरने पर सरकार लागत और बाजार मूल्य के बीच का अंतर भरपाई के रूप में देती है।

Q4: किसान प्राकृतिक खेती क्यों अपनाएं?
A4: यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, लाभकारी कीट बचाती है और उत्पादन को स्थायी बनाती है।

Q5: Khetivyapar के जरिए किसान क्या कर सकते हैं?
A5: किसान Khetivyapar से परियोजना की जानकारी, नवीनतम अपडेट और सब्सिडी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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