आम के बागों में इस समय फलों पर काले धब्बे दिखने की समस्या तेजी से सामने आ रही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ सकता है। इस समस्या को ‘कोयलिया रोग’ या ‘ब्लैक टिप’ कहा जाता है, जो मुख्य रूप से प्रदूषण और पोषक तत्वों की कमी के कारण फैलता है। इसलिए किसानों को इस समय बागों की विशेष निगरानी और देखभाल करना बेहद जरूरी है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस रोग का सबसे बड़ा कारण आसपास चल रहे ईंट भट्टों से निकलने वाली हानिकारक गैसें होती हैं। भट्टों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड गैस जब आम के बौर और छोटे फलों के संपर्क में आती है, तो फल के निचले हिस्से पर काले धब्बे बनने लगते हैं। इसके अलावा, मिट्टी में बोरॉन की कमी भी इस समस्या को बढ़ाती है, जिससे फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
इस रोग से बचाव के लिए समय पर सही घोल का छिड़काव बेहद जरूरी है। 1 लीटर पानी में 6 ग्राम बोरॉन मिलाएं, इसमें 6 ग्राम कपड़े धोने वाला सोडा डालें, इस घोल को अच्छी तरह मिलाकर फसलों पर छिड़काव करें। यह उपाय फलों को काले धब्बों से बचाने में कारगर साबित होता है और फसल की गुणवत्ता बनाए रखता है।
आम के पेड़ ऊंचे होते हैं, इसलिए छिड़काव के लिए प्रेशर स्प्रेयर या टैंकर का उपयोग करना अधिक प्रभावी रहता है। पहला छिड़काव फल बनने की शुरुआत में करें, दूसरा छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर दोहराएं और पूरे पेड़, खासकर फलों वाले हिस्से पर समान रूप से स्प्रे करें।
लापरवाही से हो सकता है भारी नुकसान:
यदि समय पर रोकथाम नहीं की गई, तो फल काले और सख्त हो जाते हैं, जिससे उनकी बाजार कीमत कम हो जाती है। कई मामलों में फल गिरने भी लगते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बागवानों के लिए जरूरी सलाह:
विशेषज्ञों का मानना है कि रोग के लक्षण दिखने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही सावधानी बरतना अधिक फायदेमंद होता है। यदि बाग के आसपास ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं, तो नियमित निगरानी और समय पर छिड़काव बेहद जरूरी है। सही प्रबंधन अपनाकर किसान न केवल अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता के साथ अच्छा बाजार मूल्य भी प्राप्त कर सकते हैं।
FAQs:
Q1. ब्लैक टिप रोग क्या है?
ब्लैक टिप रोग आम के फलों पर काले धब्बे बनने वाली समस्या है, जो प्रदूषण और पोषक तत्वों की कमी से होती है।
Q2. ब्लैक टिप रोग का मुख्य कारण क्या है?
ईंट भट्टों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड गैस और मिट्टी में बोरॉन की कमी इसका मुख्य कारण है।
Q3. ब्लैक टिप रोग का इलाज क्या है?
1 लीटर पानी में 6 ग्राम बोरॉन और 6 ग्राम सोडा मिलाकर छिड़काव करना प्रभावी उपाय है।
Q4. छिड़काव कब करना चाहिए?
पहला छिड़काव फल बनने पर और दूसरा 15 दिन बाद करना चाहिए।
Q5. ब्लैक टिप रोग से कितना नुकसान हो सकता है?
यह रोग फलों की गुणवत्ता घटाकर बाजार कीमत कम कर देता है और उत्पादन में भी नुकसान करता है।