हम ज़्यादातर समय कमरे में रहते हैं, जिससे शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा खत्म होने लगती है।
धूप न मिलने से हड्डियाँ कमजोर होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है।
प्राकृतिक भोजन छोड़कर पैकेट वाला खाना पाचन बिगाड़ देता है।
ताज़ी हवा की जगह स्क्रीन, प्रदूषण और तनाव आ जाता है।
प्रकृति के नियम न मानने से नींद और मानसिक संतुलन खराब हो जाता है।
प्रकृति के खिलाफ जीने वाला इंसान धीरे-धीरे मरीज बन जाता है।