शरीर जमा हुआ ग्लूकोज़ खर्च करने लगता है, जिससे इंसुलिन लेवल कम होता है।
फैट बर्निंग शुरू होती है, शरीर ऊर्जा के लिए चर्बी को तोड़ने लगता है।
पाचन तंत्र को आराम मिलता है, सूजन और गैस की समस्या कम होती है।
ऑटोफैजी प्रक्रिया सक्रिय होती है, जिसमें शरीर खराब कोशिकाओं को साफ करता है।
मानसिक स्पष्टता बढ़ती है, दिमाग़ ज़्यादा शांत और फोकस्ड महसूस करता है।
भूख और खाने की आदतों पर नियंत्रण सुधरता है, ओवरईटिंग कम होती है।